May 5, 2023


ज़मीं छूट चुकी है, आसमां मिला नहीं

हम दिलजलों का यारों कोई खुदा नहीं।
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ज़मीं छूट चुकी कब की, आसमां अभी मिला नहीं
हम दिलजलों का यारों होता कोई खुदा नहीं।
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ज़मीं छूट चुकी है, आसमां है कोसों दूर
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ज़मीं छूट ही चुकी, आसमां कभी मिलना नहीं 
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ज़मीं छोड़ चुके हैं, आसमां मिला भी तो हमसे ना संभलना,
मंझधार में पतवार हैं पकड़े, पर खिवैया हमें ना समझना।
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It won't cut.

Posted by .. Vik . at 11:49 PM

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