पतझड़ के पत्तों सी हाय लाल-पीली तू,
ज़न्नत सी ज़िंदगानी में एक खलबली तू।
दिखी हर शक्ल में इन दिनों घुली-मिली तू,
इच्छाधारी नागिन जीवन में बस एक मिली तू।
थोड़ा तुझमें गुरुर था, थोड़ी मुझ में सनक,
मैं बुरा हूँ ये माना, पर है कहाँ भली तू।
राहें चाहे अपनी टकराएँ न फिर कभी,
रहे सदा यूं ही यारां खिली-खिली तू।
:)
March 10, 2008
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5 comments:
wah..!!Wah!!
Why do I feel it's for beer...
yeh kya hai ??? :)
[]Aanchhiii!
[]Shukriya!
[]Quite close! :P
[]Song of the Year, my friend!
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